यू पहुंचे
सपनो के शहर लंदन
विजय सिंह 'कौशिक'
आखिरकार आज इस लंदन को साक्षात देखने का मेरा बचपन का सपना पूरा होने जा
रहा था। हालांकि अभी भी मन मे दुविधा थी। लंदन जाने को
लेकर अभी भी उहापोह की स्थिति बनी हुई थी। दरअसल मेरे यूके के वीसा में स्पेलिंग
मिस्टेक हो गई थी। आखिरकार यह सोच कर यात्रा करना तय किया कि यदि इमिग्रेशन
अधिकारियों ने नहीं जाने दिया तो एयरपोर्ट से लौट आएंगे। नीदरलैंड के अपने मित्र
लुइस भाई को भी बता दिया कि अपने तीनों साथियों के साथ मैं भी लंदन जा रहा हु।
नहीं जा पाया तो वहाँ से सीधे आप के घर पहुच जाऊंगा। पेरिस के होटल से चेक आउट कर
पास में स्थित रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ कर एयरपोर्ट पहुचना था। नारो दे रेलवे
स्टेशन से जो ट्रेन मिलती है, वह सीधे एयरपोर्ट के भीतर
पहुचा देती है। प्लेटफॉर्म और एयरपोर्ट के बीच बस एक सीढ़ी का अंतर है। स्वचालित
मशीन से हमने टिकट खरीदा और एयरपोर्ट वाली ट्रेन पकड़ने प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँच गए।
मैं और दिनेश ट्रेन में सवार हो गए पर आदित्य जी राजकुमार जी के ट्रेन
पकड़ने से पहले वह छूट गई। इस बीच मैंने 2 हजार रुपये खर्च कर अपना मोबाईल नंबर दो दिनों के लिए इंटरनेशनल रोमिंग करा लिया था। यह सुविधा काम आ गई।
आदित्य जी ने मेरे मोबाईल पर कॉल कर बोले कि आप दोनों एयरपोर्ट वाले रेलवे प्लेटफॉर्म
पर हमारा इंतज़ार करो। मैं राजकुमार सिंह अगली ट्रेन से आ रहे हैं। अगली ट्रेन भी
सिर्फ 5 मिनट बाद की थी। मैं दिनेश के साथ एयरपोर्ट रेलवे स्टेशन पहुच कर अपने दोनों साथियों का इंतज़ार करने लगे। 20 मिनट बाद वे दोनों भी आ
गए। स्वचालित सीढ़ियों से एयरपोर्ट पहुँच गए। यहां सुरक्षा जांच की औपचारिता पूरी
कर विमान पकडने के लिए आगे बढ़े तो पता चला कि लंदन जाने वाली हमारी फ्लाईट डेढ़
घंटे देरी से उड़ान भरेगी।
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लंदन के भारतीय दुतावास में
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लंदन पहुँच कर हमें एयरपोर्ट से सीधे लंदन के भारतीय
दूतावास में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने जाना था। उत्तर प्रदेश कम्युनिटी
एसोशिएशन ऑफ यूनाइटेड किंगडम के संस्थापक संतोष गुप्ता जी ने हमे आमंत्रित किया
था। भारतीय दूतावास की तरफ से आमंत्रण हमे ईमेल पर मिल चुका था। 1 घंटे
20 मिनट की हवाई यात्रा के बाद हम लंदन के साउथइंड एयरपोर्ट पर
थे। लंदन शहर और आसपास कुल पांच एयरपोर्ट हैं। विमान से उतर कर सामने ही स्थित
इमिग्रेशन काउंटर पर पहुंच गए। यूरोप से बाहर के यात्रियों को इमिग्रेशन फार्म भी
भरना था। हम भी फार्म भरने में जुट गए। काउंटर पर पहुंचे तो इमिग्रेशन अधिकारी ने
पूछा क्यों आए हो लंदन और क्या करते हो। जवाब में मैंने बताया कि लंदन की सैर करने
आए हैं और पेशे से पत्रकार हैं। साथ भारतीय दुतावास के कार्यक्रम के बारे में भी
बताया। पत्रकार जान कर अधिकारी ने मुस्करा कर कहा वेलकम इन लंदन। बायोमैट्रीक मशीन
पर हमारे अंगुलियों की छाप का मिलान कर पासपोर्ट पर मुहर लगा कर हमें चलता किया।
बाहर निकले तो सामने ही रेलवे स्टेशन दिखाई दिया। एयरपोर्ट के गेट और रेलवे
प्लेटफार्म की दूरी कुछ ही कदमों की थी। देख कर अच्छा लगा कि यूरोपिय देशों में
ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी बहुत अच्छी और सुविधाजनक है। एक-एक हजार रुपए खर्च कर
ट्रेन का टिकट निकाले और पहली बार लंदन की ट्रेन में सवार हो गए और पहुंच गए
भारतीय दुतावास। भारतीय
दूतावास के आमं
आमंत्रितों की सूची में हम भी शामिल थे। यहाँ बड़ी संख्या में भारतीय
जूट हुए थे। मौका था इंडियन चेम्बर ऑफ यूथ इंतोप्रेन्योर के वार्षिकोत्सव का। यहाँ
बड़ी संख्या में उत्तरभारतीय भी मौजूद थे। कार्यक्रम के वक्ताओं को भारत की मोदी
सरकार से बड़ी उम्मीदें दिख रही थी। उनको लगता रहा था कि भारत मे इन दिनों कुछ
अच्छा हो रहा है। यहाँ हमारी मुलाकात उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के मूल निवासी
मधुरेश मिश्र जी और कानपुर के रहने वाले अभिषेक तिवारी जी से हुई। दोनों बड़े
आत्मीयता से मिले। मिश्रा जी ने अपना मोबाईल नंबर दिया और लंदन यात्रा के दौरान
किसी दिन मिलने के आमंत्रित किया। कार्यक्रम के बाद स्वादिष्ठ भारतीय भोजन और
मिष्ठान खाकर आनंद आ गया।
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लंदन के रेलवे स्टेशन पर कानपुर के तिवारी जी के साथ
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इस बीच लंदन के हमारे
मेजवान विनोद भाई शाह जी का कई बार फोन आ चुका था। हमे लंदन से 35 किलोमीटर दूर लुटन शहर में
विनोद भाई के घर पर ही ठहरना था। कुछ महीनों पहले मुंबई में हमारी मुलाकात विनोद
भाई से हुई थी। वर्षो पहले विनोद भाई केनिया से इंग्लैंड पहुचे थे। काफी संघर्ष के
बाद इन्होंने यहा अपना मुकाम बनाया है। आज यहाँ उनकी चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म है।
उनकी श्रीमती जी और बेटा भी उनके साथ यहा कार्यरत हैं। मूलरूप से गुजरात के जूनागढ़
के रहने वाले विनोद भाई अंग्रेजी मिश्रित हिंदी में हमसे बाते करते हैं। रात करीब 11 बजे हम लंदन के भारतीय
दूतावास में मिले भारतीयों को अलविदा कह लूटन के लिए रवाना हुए। दूतावास के पास
में ही रेलवे स्टेशन है। थोड़ी पैदल यात्रा के बाद हम रेलवे स्टेशन पहुच गए। कानपुर
के तिवारी जी भी स्टेशन तक साथ आये। तिवारी ने बताया कि पहले उनकी श्रीमती जी को
लंदन में नौकरी मिली तो एक साल पहले वे भी पत्नी जी कि कृपा से डिपेंडेंट वीजा पर लंदन
आ गए। दोनों इंजीनियर हैं।
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लुटन में विनोद भाई व नट्टू भाई के साथ
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लंदन में दिनभर की यात्रा के लिए वन डे टिकट मिलता है। इससे आप यहाँ की
ट्रेन, ट्यूब ट्रेन ( यहाँ की
भूमिगत मेट्रो को इसी नाम से जानते हैं), डबल डेकर बस और टूरिस्ट बस
में यात्रा कर सकते हैं। लंदन एयरपोर्ट से निकलने के बाद हमने 1-1 हजार भारतीय रुपये खर्च कर
वन डे टिकट खरीदा था। दूतावास से स्टेशन पहुचे तो पता चला मेरा टिकट कही खो गया। 1 हजार की चपत लग चुकी थी।
पेरिस की तरह यहाँ भी टिकट खिड़की पर कोई टिकट बेचने वाला नही था। कार्ड से खुद ही
टिकट निकालनी थी। तिवारी जी ने इसमे हमारी मदद की। अपने कार्ड से मेरा लुटन जाने
के लिए टिकट निकाला। हमने कैश के रूप में टिकट का पैसा जबरन उनकी जेब के हवाले
किया और प्लेटफॉर्म की तरफ बढ़ गए। तिवारी जी हमे हमारी ट्यूब ट्रेन तक पहुचाने
प्लेटफ़ॉर्म तक आये। उनकी ट्रेन दूसरी दिशा से मिलने वाली थी। फिर मिलने के वादे के
साथ तिवारी जी से विदा लिया और अपनी मंजिल के लिए ट्रेन में सवार हो गए। विनोद भाई
लुटन स्टेशन पर कार के साथ हमारा इंतज़ार कर रहे थे। करीब 1 घंटे की यात्रा के बाद रात 12 बजे हम लुटन पहुच गए।
विनोद भाई ने देखते ही गले लगा लिया। रात में ठंड और बढ़ गई थी। खाना तो भारतीय
दूतावास में हो चुका था। इस लिए विनोद भाई के दो मंजिला बंगले में पहुच कर बिस्तर
के हवाले हो गए। (जारी)
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