यूरोप यात्रा-9
लंदन की थेम्स, बनारस की गंगा
विजय सिंह ‘कौशिक’
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| लंदन के थेम्स नदी पर बना लंदन ब्रिज |
एक दिन पहले हम लंदन पहुंचे थे। वह पूरा दिन यात्रा और भारतीय
दूतावास के कार्यक्रम में बीत गया था। वास्तव में लंदन यात्रा अब शुरू होने वाली
थी। 19 मई 2018 की सुबह हमने लंदन से 35 किलोमीटर दूर लूटन में आंख खोली। लूटन लंदन के पास स्थित एक शहर है, जैसे अपनी मुंबई के आसपास वसई-विरार और कल्याण-दिवा जैसे इलाके हैं। पर वहां लूटन
से लंदन तक आने-जाने के लिए अमानवीय स्थित में यात्रा नहीं करनी पड़ती। सुबह 10 बजे विनोद भाई शाह जी के घर से नास्ता कर हम लंदन भ्रमण के लिए निकले। विनोद
भाई हमें रेलवे स्टेशन तक अपनी कार से छोड़ने जा रहे थे। रास्ते मे एक क्रिकेट
ग्राउंड दिखाई दिया। विनोद भाई ने बताया कि यह लूटन इंडियन क्रिकेट क्लब है।
स्थानीय भारतीयों ने यह क्रिकेट क्लब बनाया है। यह जानकर हमे यहां कुछ समय रुकने
का मन हुआ।
लूटन के इंडियन क्रिकेट क्लब मैदान पर
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| लंदन के समीप लूटन में इंडियन क्रिकेट क्लब में |
रेलवे स्टेशन पर हजार-हजार रुपये
में फैमली टिकट खरीद हमने लंदन शहर यात्रा की शुरुवात की। इस टिकट से
ट्रेन के अलावा लंदन शहर में चलने वाली ट्यूब ट्रेन ( मेट्रो), डबल डेकर बस के साथ पर्यटक बस में भी यात्रा कर सकते हैं। ट्रेन पकड़ कर
ब्लैक फायर स्टेशन पंहुचे। सामने थेम्स नदी पर लंदन की पहचान लंदन ब्रिज खड़ा दिखाई
दिया। लंदन शहर के बीच बहने वाली साफ स्वच्छ थेम्स नदी को देख कर हमें अपने शहरों
कि नदियों की याद आ गई जो शहर की गंदगी साफ करते खुद गंदे नाले में तब्दील हो गई
हैं। हालांकि एक ऐसा भी समय था जब थेम्स नदी की हालत भी हमारी गंगा-यमुना जैसी हो
गई थी। थेम्स को आज देखें तो यह यक़ीन करना मुश्किल है कि कभी यही
ख़ूबसूरत नदी बीमारियों की जड़ हुआ करती थी। पर 50
साल तक सीवरेज ट्रीटमेंट और उसे नदी में जाने से रोकने का नतीजा है
कि आज थेम्स के पानी की गुणवत्ता सुधरी है। जबकि वर्ष 1858 में हालात यहां तक पहुंच गए थे कि इससे निकली बदबू की वजह से संसद की
कार्यवाही रोकनी पड़ी थी। थेम्स को एक तरह से मृत नदी घोषित कर दिया गया था। इसके
बाद सरकार ने सीवेज ढांचे में भारी निवेश किया और प्रदूषण से निपटने के लिए कड़े
क़दम उठाए। पर दूसरी तरफ हजारों करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी हमारी गंगा मैली
की मैली ही रह गई।
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| लंदन में ट्रेन की सवारी |
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| लूटन (लंदन) में राधा-कृष्ण मंदिर |
ब्रिज
पार कर आगे पहुंचे थे कि लंदन दर्शन करने वाली ओपेन डेक वाली पर्यटक बस दिखाई दी।
राजकुमार जी ने ड्राईवर को अपना टिकट दिखा तस्दिक की कि यह टिकट इस बस में चलेगा। ड्राईवर
महोदय की स्वीकृति के बाद हम बस में सवार हो गए। यहां चलने वाली दो मंजिला बसों
में एक भी कंडक्टर नहीं होता। खुद टिकट खरीदों और जहां उतरना हो, उतर जाओ। बस में
वाई-फाई और कमेंट्री की व्यवस्था थी। वहां रखे पैकेट बंद ईयर फोन उठाओ और हर सीट
के बगल में लगे साकेट में लगा कर यात्रा की कमेंट्री सुन सकते हैं। अंग्रेजी के
अलावा हिंदी का भी विकल्प था। अच्छा लगा कि हिंदुसतान में इतने वर्षों तक राज करने
के बाद अंग्रेजों ने हिंदी को याद रखा। बस जिस स्थान से गुजरती है, प्री-रिकार्डेड
वाईस से वहां के बारे में आप को जानकारी मिलती रहती है। बस जब बर्मिघम पैलेस के
समीप से गुजरा तो हम नीचे उतर लिए। थोड़ी पदयात्रा के बाद हम बर्मिघम पैलेस के
सामने थे। ब्रिटेन की रानी का महल। महल के सामने मेला जैसा लगा था। बर्मिघम पैलेस इन दिनों
पर्यटकों के लिए खुला नही था। बाहर से ही देखना पड़ा। थोड़ा समय वहां बिताने के बाद
पास में ही लंदन आई वाला विशाल झूला लंदन आई दिखाई दिया। अब तक हम घूम-घूम कर थक
गए थे। ठिकाना हमारा लंदन से थोडी दूरी पर था। इस लिए घर वापसी की सोची और लंदन आई
के दर्शन अगले दिन के लिए छोड़ दिया। (जारी)






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