मेरी यूरोप यात्रा-4 Europe yatra
नीदरलैंड के खुबसूरत समुद्री किनारे
और दूतावासों के चक्कर
| रोटेरडम का समुद्री किनारा |
आज नीदरलैंड ( 14 मई 2018) में हमारा चौथा दिन है। मेरे यूके (लंदन) के वीसा में नाम में कुछ स्पेलिंग्स मिस्टेक हुई थी। इसलिए हमने नीदरलैंड स्थित ब्रिटिश दूतावास में संपर्क करने की सोची। लुइस भाई ने बताया कि नीदरलैंड में सभी देशों के दूतावास पास में ही स्थित हेग में हैं। हेग दुनिया मे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की वजह से जाना जाता है। दो देशों के बीच के विवाद यहां हल होते हैं। हेग के अंतराष्ट्रीय न्यायालय के बारे में स्कूल की किताबों में पढ़ रखा था। लुइस भाई के घर के पास ही यह स्थान था। कुछ मिनटों की यात्रा के बाद हम ब्रिटिश दूतावास के सामने थे। पर दूतावास का गेट बंद था और वहाँ कोई दरबान भी नही था। हम चारो दूतावास के बाहर खड़े थे तभी गेट पर लगे स्पीकर से आवाज आई। व्हाट इज मैटर। आदित्य जी ने स्पीकर के पास जाकर जवाब देने की कोशिश की पर अंदर से कुछ जवाब नही मिल सका। तभी दरवाजा खुला और एक व्यक्ति बाहर आकर हमारे यहाँ आने का कारण पूछने लगा। हमने अपनी समस्या बताई तो उसने कहा कि ‘क्षमा करें आप बगैर अपाउंटमेंट के नही मिल सकते। पहले ईमेल कर अपाउंटमेंट लें।’
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| हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय |
| अपनी हिंदी |
हम राय के बताए पते पर पहुँच गए। सामने तिरंगा लहरा रहा था और हिंदी और अंग्रेजी में भारतीय दूतावास लिखा था। हम सही जगह पर पहुंच चुके थे। भीतर थोड़े इंतज़ार के बाद हमारी मुलाकात एक सज्जन से हुई। हमने उन्हें अपनी समस्या बताई तो उन्होंने कहा कि इस मामले में ब्रिटिश दूतावास से ही कोई मदद हो सकती है पर उसमे भी समय लगता है। पर हमारे पास तो समय का ही अभाव था। उन्होंने हमें सलाह दी कि वीसा ब्रिटिश दूतावास ने जारी किया है। इसमें जो मिस्टेक हुई है उसमे आप की कोई गलती नहीं। आप यात्रा की कोशिश कर सकते हैं। हो सकता है नाम मे थोड़ी त्रुटी के बावजूद आप को जाने दिया जाए क्योंकि वीसा पर पासपोर्ट नंबर सहित अन्य जानकारी सही है।
दूतावास से निकले तो लुइस भाई ने बताया कि पास में ही यहां का सुप्रसिद्ध समुद्री बीच है। चलिए वहाँ घूम आते हैं। हम तो घूमने ही निकले थे। चल दिये सागर किनारे की सैर करने। थोड़ी देर में ही हम समुद्री तट पर पहुच चुके थे। वहां के समुंद्री किनारे अपने देश के गंदे समुंद्री बीचो की तुलना में बहुत ही साफ सुथरे हैं। समुंद्री किनारों को इतनी खूबसूरती से सहेजा गया है कि हम देखते रह गए। जगह-जगह पार्किंग की सुविधा और बॉलीवाल और रग्बी कोर्ट बने हुए हैं। किनारे पर पसरी साफ सुथरी रेप पर आदमी और औरते नग्न अवस्था में लेट कर धूप सेकने का आनंद ले रही। अगल बगल से गुजर रहे लोगों से उनके आनंद में कोई व्यवधान नहीं पड़ता। वे अपनी मस्ती में रेत पर पड़े गुनगुनी घूप का आनंद लेते रहते हैं।
दोपहर होने को आया था। भूख भी लग गई थी। लुइस भाई पास के रेस्टोरेंट में यहाँ की फेमस मछली खिलाने ले गए। जल्द ही पांच प्लेट में तली हुई बड़े आकार वाली मछली हमारे टेबल पर थी। उसके साथ एक चटनी भी परोसी गई थी जिसका कडुवा स्वाद हमे आज भी याद है। मछली तो अच्छी थी पर वह चटनी हमे जरा नही भायी हालांकि हमारे मेजवान लुइस भाई बड़े चाव से मछली के साथ चटनी भी चट कर गए। अब घर वापस चलने का समय हो गया था।
| एम्सटरडम के डैम चौक पर प्रदर्शनकारी |
शाम को एम्सटरडम जाना था। एम्सटरडम यानी नीदरलैंड की राजधानी। यह जगह हमारे निवास से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर था। शाम 4 बजे हम एम्सटरडम जाने के लिए लुइस भाई की कार में सवार हो गए। शहर में प्रवेश के बाद हम सबसे पहले एम्सटरडम के मशहूर डैम स्क्वायर (चौक) पर पहुचे। यहाँ एक संगठन के कुछ लोग हाथ मे बैनर और माइक लेकर फिलिस्तीन के समर्थन में इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। हम भी प्रदर्शनकारियो के समीप चले गए। तभी वहां से गुजर रही एक डच महिला प्रदर्शनकारियों को गाली देने लगी। शायद उसे अपने देश मे फिलिस्तीन का समर्थन और इजरायल का विरोध न भाया हो। बात ज्यादा आगे नहीं बढ़ी क्योंकि गालीगलौज करने वाली महिला जल्द ही वहाँ से चली गई। यही हमारी मुलाकात कुछ भारतीय पर्यटकों से हुई। बातचीत में पता चला कि वे भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी हैं और एक सरकारी बैठक के लिए नीदरलैंड आये हैं। यह जानने के बाद कि हम पत्रकार हैं, वे बातचीत में सावधान हो गए और अपना नाम और पद भी बताने से परहेज किया। जैसा कि मैं पहले ही बता चुका हूं कि नीदरलैंड में रात देरी से होती है। 10 बजे के बाद ही सूरज अस्त होता है। अब धीरे धीरे शाम होने लगी थी। नीदरलैंड दुनिया का एक ऐसा देश है जहाँ देह व्यापार को कानूनी मान्यता है। यहाँ देह व्यापार में लगी लडकियां शोषण का शिकार नही बल्कि टैक्स पेयर हैं। उनके साथ समय बिताने के लिए मोलभाव की जरूरत नही। रेट पहले से तय है। कार हम पार्क कर चुके थे और पैदल ही उस बाजार की तरफ चल दिये।
एम्सटरडम दुनिया के 10 सबसे व्यवस्थित शहरों में पहले पायदान पर है। पूरे शहर में नहरो का जाल बिछा हुआ है। हम अपने शहरों में कही आने जाने के लिए टैक्सी पकड़ते हैं, पर एम्सटरडम के लोग यातायात के लिए वाटर टैक्सी में सवार होते हैं। नहर यहां सड़क का काम करती है। हर कुछ मीटर की दूरी पर एक नहर है जिसमे बोट चलते हैं। शाम होते ही हर नहर के किनारों पर जाम की महफ़िले भी सज जाती हैं। यूरोप में बीयर पानी से सस्ता मिलता है। इस लिए लोग पानी से ज्यादा बीयर पीते हैं। थोड़ी देर की पैदल यात्रा के बाद हम हुस्न के बाजार में पहुँच गए थे। करीने से बने मकानों में आदमकद खिड़कियों में सुंदरियां दिखाई देने लगी। इस बाजार में घूम रहे पर्यटकों में पुरुषों के साथ महिलाओं की भी अच्छी-खासी संख्या थी। लोग खिड़की तक जाते थोड़ी बातचीत के बाद उनके इशारा करते ही बगल का दरवाजा खुल जाता और खिड़की पर पर्दे पड़ जाते। यह बाजार भी एक नगर के दोनों तरफ फैला हुआ है। कुछ समय की चहल-कदमी के बाद अब हमने घऱ वापसी की सोची क्योंकि सुबह ही हमें पेरिस के लिए विमान पकड़ना था। पैदल ही पार्किंग स्थल आए। क्रेडिट कार्ड से पार्किंग फीस चुकाई तो गेट खुला और कार लेकर बाहर निकल सके। करीब 2 घंटे की पार्किंग के लिए 2 हजार भारतीय रुपए चुकाने पड़े थे। (जारी)


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