मेरी यूरोप यात्रा-2

                                       जब एम्सटरडम एयरपोर्ट

                          पर खो गया बैग

एम्सटरडम एयरपोर्ट पर मुंबई से ले गए हापुस आम के साथ 

* विजय सिंह 'कौशिक'

नौ घंटे की हवाई यात्रा के बाद 12 मई की सुबह 8 बजे हमारा विमान नीदरलैंड की राजधानी एम्सटरडम के सिचिपोल हवाई अड्डे पर उतर चुका था। बाहर निकलते ही ठंढी हवाओ ने हमारा स्वागत किया। मुंबई कि उमसभरी गर्मी से हम ठंड के मौसम वाले देश में पहुँच गए थे। मोबाइल चालू करते ही आदित्य जी के मोबाइल पर लुइस भाई का कॉल आया। उन्होंने बताया कि वे एअरपोर्ट के बाहर इंतजार कर रहे हैं। हम चारो में से केवल आदित्य जी का ही मोबाइल इंटरनैशनल रोमिंग में था। इसके लिए उन्होंने 5 हजार रुपये में वोडाफोन से एक माह के लिए इंटरनेशनल रोमिंग सर्विस ली थी जबकि बाकी तीनो के मोबाइल वाईफाई के भरोसे थे। 
सायकिलो का देश है नीदरलैंड उर्फ हालैंड
           अब सबसे महत्वपूर्ण काम था इमिग्रेशन पार करना। किसी दूसरे देश मे पहुचने पर इमिग्रेशन काउंटर पर उस देश के इमिग्रेशन अधिकारी आप के पासपोर्ट वीजा आदि कागजात की जाँच के बाद पासपोर्ट पर इमिग्रेशन की मुहर लगाते हैं। यानी आप को वीजा अवधि तक उस देश में रहने की मंजूरी मिल गई है। हम भी इमिग्रेशन की लाइन में लग गए। हम चारों में पहला नंबर मेरा था। इमिग्रेशन अधिकारी ने पूछा,' अकेले आये हो ? मैंने बताया हम चार एक साथ आये हैं। पीछे खड़े अपने साथियों की तरफ इशारा किया तो अधिकारी ने आदित्यजी, राजकुमार जी और दिनेश जी को भी बुलाने को कहा। हम चारो साथ आ गए तो अधिकारी ने पूछा क्यो आये हो और कहाँ ठहरोगे। हमने अपने मित्र द्वारा वह पत्र अधिकारी के सामने पेश कर दिया जिस पर हमें वीजा मिला था। अधिकारी संतुष्ट नज़र आया। इमिग्रेशन अधिकारी का अगला सवाल था, 'इंडिया में क्या करते हो ?। हमारे यह बताने पर की हम चारो जॉर्नलिस्ट हैं। अधिकारी ने मुस्करा कर कहा वेलकम इन नीदरलैंड। और हमारे पासपोर्ट पर इमिग्रेशन की मुहर लगा दिया।
spijkeniss....नीदरलैंड में यहीं था हमारा ठिकाना 


       वहाँ से बाहर आये तो सामने लुइस भाई नज़र आये। देखते ही हमे गले लगाया। लुइस भाई अपने जीजा जी  दजिन बिंदा जी को साथ लाये थे। हमारे पास बड़े बड़े बैग थे इस लिए लुइस भाई दो कार लेकर आये थे। एयरपोर्ट के बाहर निकल कर हमने लुइस भाई को हापुस आम सौपते हुए तस्वीर निकली और समान कार की डिग्गी के हवाले किया। तभी दिनेश जी की नज़र अपने सामान पर गई। पता चला उनका एक एयर बैग गायब था। वह बैग एयरपोर्ट के भीतर भूल आये थे। दिनेश जी के सारे कपड़े उसी बैग में थे। बैग की खोज के लिए दिनेश-राजकुमार जी एयरपोर्ट के भीतर की और भागे। जहाँ बैग छूटा था, वह उस जगह पर नही था। करीब 25 मिनट की खोजबीन के बाद बैग पूछताछ काउंटर पर मिला। पासपोर्ट दिखाने के बाद बैग मिल गया पर आधे घंटे का समय फालतू में बर्बाद हो चुका था। मैं और आदित्यजी लुइस भाई के जीजा की कार में सवार हुए और राजकुमार-दिनेश जी लुइस भाई के साथ एयरपोर्ट से लुइस भाई के घर के लिए रवाना हुए। एयरपोर्ट से उनके घर की दूरी 85 किलोमीटर है। अब हमारा वाहन हाईवे पर दौड़ रहा था। सड़क इतनी अच्छी की ग्लास का पानी भी न छलके। रास्ते के दोनों तरफ हरियाली। करीने से कटे हुए घास के मैदान। बड़े-बड़े चारागाह। हाइवे पर लगे इंडिकेटर वाहन चालकों को बता रहे थे कि आप कितनी स्पीड से चले। सड़क पर आगे की ट्रैफिक के हिसाब से इंडिकेटर पर स्पीड लिमिट बदल रही थी और वाहन चालक उसका पालन भी कर रहे थे। 80 किलोमीटर की दूरी करीब 50 मिनट में पूरी हो गई। अब हम एक साफ सुथरी कालोनी में पहुँच चुके थे। लुइस भाई की कार अभी पीछे थी। घर की चाबी दजीन बिंदा जी के पास थी। घर का दरवाजा खोल मैं और आदित्य जी गृह प्रवेश कर चुके थे। 5 मिनट बाद राजकुमार जी और दिनेश जी भी पहुँच गए। लुइस भाई ने हमारे लिए भारतीय भोजन पहले से ही तैयार कर रखा था। आलू-भिंडी और पालक-आलू की सब्जी और पराठा- चावल। बड़ी जोर की भूख भी लग गई थी। लुइस भाई के दो मंजिला घर में ऊपर के दो कमरों में हम चारो सेट हो गए। बडा सा बाथरूम भी ऊपर ही था।


                             

स्नान के बाद हम लुइस भाई की कार में सवार हो कर रोटरडैम की सैर पर निकले। रोटरडम नीदरलैंड का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। लुइस भाई के घर से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस शहर में हम 25 मिनट में पहुच गए। यहाँ शहरों की जनसंख्या बेहद कम है। सड़को पर भी बहुत कम लोग नज़र आते हैं। अधिकांश लोग सायकिल पर ही दिखाई देते है। नीदरलैंड को साइकिलों का देश कह सकते है। हर मेट्रो स्टेशन के बाहर पार्किंग में आप को साइकिल ही सायकिल दिखाई देगी और साइकिल भी ऐसी जिस पर माँ अपने दो दो बच्चों को लेकर सफर करती दिखाई देंगी। कही भी गाड़ियों की रेलमपेल नही और वाहनों के हॉर्न सुनने को आप के कान तरस जाएंगे। 15 दिनों की यूरोप यात्रा के दौरान मुझे याद नही की कभी कही किसी वाहन के हॉर्न की आवाज सुनी हो। अब हम रोटरडम में समुन्द्र के किनारे पहुँच गए थे। यह पूरा समुन्द्र नही उसका छोटा सा हिस्सा था। जिसके दोनो तरफ दीवार बनी हुई थी। सामने बैठने के लिए बेंच लगे हुए हैं। हम भी इस साफ सुधरी सुंदर जगह पर कुछ समय बिताने के लिए बैठ गए। सामने के रेस्टोरेंट में लोग बियर की चुस्कियां ले रहे थे। यहाँ बियर पानी से सस्ता है और उसकी खपत देख लगता है कि यहाँ के लोग बियर पानी की तरह पीते हैं। इस सुंदर किनारे पर थोड़ी सी चहलकदमी कर हम आगे बढ़े तो एक बड़ी सी नदी दिखाई दी। नदी में बड़े बड़े जहाज चलते दिखाई दे रहे थे। इसी नदी पर एक पूल दिखाई दिया। लुइस भाई ने बताया कि पुल के नीचे से जहाज के गुजरने के लिए यह पुल ऊपर उठ जाएगा। तब तक एक जहाज पुल के समीप पहुचता दिखाई दिया तो हम भी यह नजारा देखने के लिए वहाँ रुक गए।
रोटेरडम में स्वचालित पुल के नीचे से गुजरता जहाज 

कार पार्किंग के लिए भारी फीस
पार्किंग मशीन पर पार्किंग फीस का भुगतान करते लुईस भाई 

लुइस भाई ने कार पार्किंग में खड़ी की। यूरोप में कार पार्किंग बहुत ही महंगा है और ज़रूरी भी। पार्किंग का पैसा लेने वाला कोई नही रहता पर हर आदमी भुगतान करता है। पार्किंग स्थल पर एक मशीन लगी रहती है। अपने डेबिट अथवा क्रेडिट कार्ड को मशीन में स्वैप करे। कितने समय की पार्किंग चाहिए बताये। उसके बाद उतनी धनराशि आप के खाते से कट जाएगी। यदि उचित पार्किंग का भुगतान नहीं किय़ा तो जुर्माने के साथ पार्किंग बिल की रसीद आप के पते पर भेज दी जाएगी। उसके बाद कार मालिक को उसका भुगतान करना ही पड़ेगा। कार पार्क कर हम नदी के किनारे पहुंच चुके थे तब तक जहाज भी पुल के पास पहुंच चुकी थी। जहाज से वहां पहुंचने से कुछ समय पहले ही पुल ऊपर उठ गया। इसके पहले दोनों तरह के वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी। अब जहाज पुल से गुजर चुका था और पुल अपने स्थान पर पूर्ववत हो चुका था। नदी के किनारे व्यायाम के लिए उपकरण लगाए गए हैं। वहां कुछ लड़के-लड़कियां बॉक्सिंग का अभ्यास भी कर रहे थे। हमें देख कर उनमें से एक ने कहा इंडिया। राजकुमार जी ने मुस्करा कर जवाब दिया यस। अभी भी शाम ढलने में काफी समय था। यूरोप में शाम 10 बजे के बाद सुर्य अस्त होते हैं। यानि जब भारत में रात के 10 बज रहे होते हैं तो यूरोप में हर तरफ उजाला पसरा रहता है। आज की यात्रा पूरी हो चुकी थी। इस लिए हम लईस भाई की कार में सवाल होकर घर की तरफ रवाना हुए। घर पर लुईस भाई के छोटे भाई हमसे मुलाकात के लिए आने वाले थे और अगले दिन नीदरलैंड का मशहूर ट्यूलिप गार्डन देखने की योजना थी। (जारी)

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