थाईलैंड यात्रा- 3 बैंकाक में बसता है एक उत्तर भारत

                              
          थाईलैंड में बसता है एक उत्तर भारत 
बैंकाक में भारतवंशी श्याम सिंह-शोभा सिंह परिवार के साथ 

                                            विजय सिंह कौशिक

आज (14 सितंबर 2017) पटाया से बैंकाक के लिए रवाना होना था। फेसबूक के माध्यम से हमारे फेसबुकिया मित्रो को हमारे थाइलैंड में होने की जानकारी मिल गई थी। गोरखपुर में रहने वाले मेरे फेसबूक मित्र आलोक विकाशचंद कौशिक जी ने फेसबुक पर  संदेश भेजा कि ' अपने बहुत से लोग बैंकाक में हैं, कोई जरूरत हो तो बताना' मैने जवाब में लिखा कोई जरूरत तो नही पर परदेश में अपने देशवाशियों से मिल कर अच्छा ही लगेगा। उसके बाद आलोक जी ने बैंकाक में रहने वाले अपने रिश्तेदार श्याम सिंह जी और उनकी धर्मपत्नी शोभा सिंह जी को हमारे बारे में बताया और हमारा फोन नंबर भी उन्हें दे दिया। श्याम जी और शोभा जी का मोबाइल नंबर भी हमे मैसेज कर दिया। मैने शोभा जी को व्हाट्सएप कॉल कर बता  दिया कि आज शाम तक हम बैंकाक पहुँच जाएंगे। हमारा ठिकाना sukhumwit के होटल paradise sukhumvit में है। शोभा जी ने बताया कि वे भी sukhumvit में ही रहती हैं। बैंकाक पहुच कर मिलना तय हुआ।
                                 होटल से तैयार हो निकले और दोपहर का भोजन लेने केरल वाले मैथ्यू जी के होटल पहुचे। खाना खाने के बाद मैनेजर शान से पटाया से बैंकाक जाने के लिए वाहन के बारे में पूछताछ की तो उन्होंने बताया पटाया में चलने वाली टैक्सी वाले भी यात्रियों को लेकर बैंकाक जाते हैं। हमारे साथी संतोष सागर ने टैक्सी वालो से बातचीत शुरू की। वे बैंकाक के लिए 1500 बाट ( 3 हजार भारतीय रुपये) मांग रहे थे जबकि हम बैंकाक एयरपोर्ट से पटाया जिस कार से आये थे उसके लिए 1 हजार बाट चुकाया था। संतोष ने यह बात एक टैक्सी वाले को बताई तो वह 1 हजार बाट में थाईलैंड छोड़ के लिए तैयार हो गया। इंडियन रेस्टोरेंट के मालिक मैथ्यू, शान और रेस्टोरेंट स्टाफ से फिर मिलने के वादे के साथ हम विदा हुए। हमारी पटाया से थाईलैंड की 150 किलोमीटर की यात्रा शुरू हो गई थी। शाम करीब 4 बजे हम थाईलैंड के sukhumvit paradise होटल पहुच गए थे। होटल में जो सज्जन मिले वे भारतीय नज़र आये तो हमने हिंदी में बातचीत शुरू की। वे उर्दू मिश्रित हिंदी बोल रहे थे। उन्होंने अपना नाम अली बताया। अली हिंदुस्तानी नही पाकिस्तानी थे। यह होटल दिल्ली के एक सरदार जी का है। होटल स्टाफ में अधिकांश पाकिस्तानी और कुछ हिंदुस्तानी हैं। अच्छा लगा कि यहाँ भाषा की समस्या नही थी। होटल की तीसरी मंजिल पर फ्लैटनुमा कमरा मिला। ड्राइंग रूम किचन और दो कमरे। होटल के कमरे पहुँच हाथ मुह धोने के बाद मैंने सोचा आलोक जी के रिश्तेदारों से मिल लेते है, तब तक हमें यह अहसास नही था कि इस परिवार से हमारे गहरे रिश्ते बन जाएंगे। मैंने शोभा जी को व्हाट्सएप काल कर बताया कि हम बैंकाक के होटल पहुच चुके हैं। टैक्सी लेकर हम शोभा जी के बताए पते पर पहुँच गए। तब तक श्याम सिंह जी अपने ऑफिस  से नही लौटे थे। हम एक भव्य बंगले में पहुच चुके थे। कुछ समय बाद श्याम जी भी आ गए। हमे ऐसा लगा ही नही की इस परिवार से हम पहली बार मिल रहे हैं। इस परिवार की आत्मीयता से हम बेहद प्रभावित हुए। श्याम जी और शोभा जी थाईलैंड में ही जन्मे हैं। इस लिए इनके पास थाई नागरिकता है। उन्होंने बताया कि दादा जी बर्मा से होते हुए थाईलैंड पहुँचे थे। परिवार में पति पत्नी के अलावा दो बेटियों और एक बेटा है। कुछ ही समय मे हम घुलमिल गए। हम तो बस ऐसे ही एक भारतीय परिवार से मुलाकात करने आये थे पर इस परिवार ने जो आत्मीयता दिखाई उससे हम इस परिवार के सदस्य जैसे हो गए। फिर तो अगले चार दिन श्याम भाईसाहब और शोभा भाभी के साथ ही बीता। यह परिवार फर्राटेदार थाई भाषा के साथ अच्छी भोजपुरी भी बोलता है। इस बीच हमारे सह यात्री लोकगायक सुरेश शुक्ला जी के सिंगिंग कैरियर के बारे में बाते हुई तो बंगले में रखे विशाल स्क्रीन वाले टीवी पर यूट्यूब पर मौजूद सुरेश के गीतों फिल्मो के वीडियो देखकर श्याम जी शोभा भाभी उनके लोक गायन से प्रभावित हुए।
               
यूट्यूब पर लोक गायक सुरेश शुक्ल का वीडियो देखते शोभा सिंह परिवार
 श्याम जी और शोभा भाभी ने यहाँ के दो प्रसिद्ध हिन्दू मंदिरो विष्णु मंदिर और गीता आश्रम के बारे में बताया। गीता आश्रम पास में ही था। इसलिए फिलहाल, गीता आश्रम चलने का फैसला हुआ। एसयूवी 
( कार) की ड्राईविंग सीट शोभा भाभी ने संभाली और हम गीता आश्रम के लिए रवाना हो गए। गीता आश्रम एक भव्य दिव्य मंदिर है। मंदिर के मुख्य पुजारी मिश्रा जी से हमारी मुलाकात हुई। मिश्रा जी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के निवासी हैं। बैंकाक में रहने वाले उत्तरभारतीयों में अधिकांश एक ही जिले गोरखपुर के रहने वाले हैं। करीब 5 लाख गोरखपुरी थाईलैंडवासी हो गए हैं। मंदिर के मुख्य हाल में कालीन लगा हुआ है। साफ सफाई के मामले में यहाँ के मंदिरों का कोई जवाब नही। सुरेश शुक्ल ने पुजारी मिश्रा जी को एक भजन सुनाया तो वे भी उनके गायन से प्रभावित हुये। अगले दिन शनिवार का दिन था। मिश्रा जी ने बताया कि शनिवार व रविवार को भारतवंशी यहाँ जुटते हैं। इसलिए शनिवार को सुरेश के भजनों को कार्यक्रम रखना तय हुआ। मंदिर के प्रांगण में दुर्गापूजा के लिए मंच और मूर्ति बनाने का काम चल रहा था। यहां हमारी मुलाकात मंदिर के प्रबंध समिति से जुड़े प्रदीप पांडेय जी से हुई। वे भी मूलरुप से गोरखपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि बैंकाक के दो मंदिरो विष्णु मंदिर और गीता आश्रम में हर साल दुर्गा पूजा का आयोजन होता है। इसके लिए कोलकत्ता से मूर्तिकार बुलाये जाते हैं। मिट्टी भी भारतभूमि से आती है। 
                         
गीता आश्रम मंदिर में दुर्गा पूजा तैयारी का दृश्य 
तब तक रात के 10 बज चुके थे। श्याम जी शोभा भाभी के साथ उनके घर लौटे। विदेश में घर का बना उत्तरभारतीय भोजन कर आनंद आ गया। इस बीच तय हुआ कि सुबह pratunam के इंदिरा मार्केट से खरीदारी के लिए चलेंगे और शाम को गीता आश्रम मंदिर में सुरेश जी का भजन कार्यक्रम पहले से तय था ही। भोजनोपरांत श्याम जी हमे होटल तक पहुँचा दिए। सुबह मिलने के वादे के साथ हमने उन्हें शुभरात्रि बोला और कमरे में पहुच कर बिस्तर के हवाले हो गए। (जारी)

                                    ( लेखक दैनिक भास्कर, मुंबई के प्रमुख संवाददाता हैं) 

Comments

Popular posts from this blog

मेरी यूरोप यात्रा-1 MY Europe Travel

यूरोप यात्रा-7

यूरोप यात्रा-9