मेरी थाईलैंड यात्रा- 2 पटाया

    
                       

              पटाया में गूंज रही हिंदी

                                        विजय सिंह कौशिक
                                           पटाया का समुद्री किनारा
हम पटाया स्थित होटल के कमरे में पहुंच चुके थे। हम तीनों में से किसी का मोबाईल इंटरनेशनल रोमिंग की सुविधा वाला नहीं था। घरवालों को विदेश पहुंचने की सूचना देना भी जरूरी था। होटल में वाई-फाई की सुविधा मौजूद थी। व्हाट्सएप चालू करने के लिए होटल के मैनेजर से पासवर्ड हासिल किया। विदेश यात्रा के दौरान व्हाट्सएप खुब कारगार रहा। व्हाट्सएप कालिंग से घर पर बात हो गई साथ ही मुंबई में क्या हो रहा हैइसकी भी जानकारी मिलती रही।
                 होटल बुकिंग के दौरान वेबसाईट ने होटल कमरे की जो तस्वीरे दिखाई थीहोटल का कमरा बिल्कुल वैसा ही था। यह देख कर खुशी हुई कि इस मामले में कोई चीटिंग नहीं हुई थी। स्नान-ध्यान के बाद हम होटल से बाहर निकले तो देखा कि कुछ कदमों की दूरी पर ही पटाया बीच है। होटल बुक करते समय हमें यह नहीं पता था कि हमारा होटल बिल्कुल बीच के पास होगा। हम तीनों होटल से बीच की तरफ बढ़े। तभी रास्ते में ‘नमस्कार’ की आवाज सुनाई दी तो हमारे कदम रुक गए। सामने रास्ते के बीचों-बीच लगी कपड़ों की दुकान से यह आवाज आई थी। हम कुछ पूछ पाते इससे पहले महाशय ने खुद बता दियासर मेरा नाम राहुल हैराहुल गांधी नहीं। अब उन्होंने अपने साथ राहुल गांधी की चर्चा क्यों की हमें नहीं पता। खैर राहुल कि बिहारी टोन वाली हिंदी सुन कर हमारे साथी सुरेश शुक्ल ने कहा कि आप तो बर्मा नहीं बल्कि बिहार के लग रहे हैं। तब तक राहुल बता चुके थे कि वे मूलरुप से पड़ोसी देश बर्मा (म्यानमार) के रहने वाले हैं और 20 वर्षों से पटाया में हैं। राहुल की दुकान के अगल-बगल के सभी दुकानदार अच्छी हिंदी बोलने वाले मिले। राहुल बताते हैं कि हिंदी बोलने से दुकानदारी में तो फायदा होता है पर अधिकांश लोग हमें भारतीय समझ लेते हैं और भारत से आने वाले पर्यटक ही कहते हैं कि भारतीय ही भारतीय को लूटता है। इस लिए इनके यहां से खरीदारी करना ठीक नहीं।

अल्काजार शो की प्रस्तुति

हम इस वादे के साथ आगे बढ़े कि पटाया छोड़ने से पहले आप के यहां से कुछ  कपड़े जरूर खरीदेंगे। बाद में हमने यह वादा पूरा भी किया। सामने समुद्र की लहरे हमारा इंतजार कर रही थी। समुद्री बीच तो हमारे मुंबई में भी हैं। लेकिन पटाया के समुद्र का पानी बिल्कुल साफ नदियों के पानी जैसा है। समुद्र में जहां तक आप की नजर जाएगी, बोट ही बोट दिखाई देंगे। धूप तेज हो रही थी। हम कुछ वक्त ही बीच पर ठहरे और भारतीय भोजन की तलाश में आगे बढ़े गए। थाईलैंड  में  स्ट्रीट फुड खुब बिकते हैं। लेकिन थाई फुड से जो महक आ रही थी वह हमें रास नहीं आई। हम तय कर चुके थे कि थाई भोजन करना हमारे वश का नहीं हैं। बीच से थोड़ा आगे बढ़े तो एक साथ कई इंडियन रेस्टोरेंट दिखाई दिए। इनमें एक रेस्टोरेंट ‘इंडिगो-इंडियन रेस्टोरेंट’ में हम घूसे। यहां होटल का पूरा स्टाफ हिंदीभाषी है। बैठते हीं वेटर आर्डर लेने हमारे पास आ गई। वह 17-18 साल की लड़की थी। उसको खाने का कुछ आर्डर देते उससे पहले पूछा इंडिया  से हो? जवाब मिला नहीं, बर्मीज हूं। उसनें अपना नाम शारु बताया। शारु से पता चला कि इस होटल के मालिक मैथ्यू केरल के निवासी हैं। तब तक होटल के मैनेजर शान भी हमारी टेबल के पास आ गए। इस बीच हमनें दाल-सब्जी और तंदूरी रोटी का आर्डर दे दिया था। शान ने बताया कि 10 साल पहले वे केरल से पटाया आ गए थे। शान की फर्राटेदार हिंदी सुन कर मैंने पूछा आप केरल से हैं पर आप कि हिंदी बड़ी अच्छी है। शान ने कहा कि सब सिखना पड़ता है साहब। बगैर हिंदी के यहां धंधा कैसे करेंगे। खाना खाने के बाद होटल के मालिक मैथ्यू से भी हमारी मुलाकात हुई। मृदभाषी मैथ्यू बड़े गर्मजोशी के साथ मिले। अपना मोबाईल नंबर दिया और हमारे नंबर भी सेव कर लिए। अब व्हाट्सएप के माध्यम से हम सम्पर्क में हैं।


खाने के बाद हमनें श
पटाया के वाकिंग स्ट्रीट पर हिंदी में लगा बैनर
आप को चाहिए तो मैं मंगा देता हूं। मैंने उन्हें तीन टिकट के लिए 1500 बाट सौप दिए। एक घंटे बाद टिकट मिलने वाला था। तब तक हम होटल के कमरे पर थोड़ा आराम करने आ गए। शाम 4 बजे शान से टिकट लेकर हम अल्काजार शो के लिए रवाना हुए। शान ने बताया कि यहां से टुकटुक (आटोरिक्शा) पकड़ कर 10 बाट के किराए में थियेटर पहुंच सकते हैं। हमनें वैसा ही किया। टुकटुक में चालक व कंडक्टर आगे की केबिन में बैठे रहते हैं। सवारी पीछे कि तरफ से सवार हो जाती है। हर यात्री के सिर के ऊपर बटन होता है। जहां रुकना हो आप बटन दबा दो टुकटुक रुक जाएगी। नीचे उतरों आगे जाकर किराए चुकाओं और चलते बनो। हमने भी ऐसा ही किया। हम उस भव्य थियेटर में पहुंच गए थे जहां अल्काजार शो होता है। कुछ समय के इंतजार के बाद शो शुरु हुआ। मंच पर लाईटिंग शानदार थी। पर्दा उठा तो एक साथ दर्जनभर से अधिक सुंदरियां मंच पर प्रकट हुई। उसकी वेशभूषा बिल्कुल महारानियों जैसी था। डेढ़ घंटे के शो के दौरान दुनियाभर के संगीत पर 50 से अधिक युवतियों ने नृत्य पेश किया। इस बीच मैं बालीवुड गीत बजने का इंतजार कर रहा था। इस शो के बारे में काफी कुछ जानकारी पहले से थी। जैसे ही हिंदी गाना बजा हाल में मौजूद भारतीयों में जोश आ गया। हम तीनों ने भी बड़े जोर से तालियां बजाई। अदभूत प्रोग्राम देखने के दौरान मैं सोच रहा था कि मुंबई आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए ऐसा कोई शो क्यों नहीं है। महाराष्ट्र की लावणी को भी लोकप्रिय बनाया जा सकता है। पर हमारी सरकारे तो सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देने की बाते करती हैं। वास्तविकता यह है कि देश के पर्यटन स्थलों पर सिर्फ पर्यटकों को लूटने का काम बड़ी ईमानदारी से किया जाता है। हर कोई पर्यटकों को चुना लगाने की फिराक में रहता है।

अल्काज़ार शो देखने के बाद हम थियेटर के बाहर निकले तो शो के कलाकार दर्शको के साथ फोटो निलकवाने के लिए अपने पूरे कॉस्ट्यूम में मौजूद थे। हालांकि इसके लिए पैसे देने पड़ रहे थे। कलाकारों के साथ फोटो खिचाने के लिए कोई तय अमाउंट नही थाफ़ोटो निकालने के बाद आप अपनी मर्जी से जो चाहे दे दें। खूबसूरत सजी धजी ये ‘लड़कियां’ दरअसल किन्नर थे। थिएटर से हम पैदल ही होटल की तरफ चल पड़े। चहल कदमी के लिए हमने समुद्री बीच वाला रास्ता पकड़ा। तब तक शाम हो चुकी थी। पटाया बीच पर सड़क के एक तरफ  बियर बारो की शृंखला है तो दूसरी तरफ बीच साइड में सौंदर्य का बाजार सज चुका था। करीब 3  किलोमीटर लंबे रास्ते पर दुनियाभर की लड़कियां मौजूद थी। उनके साथ कुछ मिनटों में ही साथ बिताने का सौदा तय होता और सुंदरियां अपने दुपहिया वाहनों पर उन्हें बैठा कर रफुचक्कर हो जाती।

पटाया मार्केट में पानी पुरी का रेट 100 बाट में यानि 200 भारतीय रुपए
थोड़ी दूरी पर पटाया की सबसे प्रसिद्ध सड़क वॉकिंग स्ट्रीट थी। उसे देखने की चाहत लिए हम भी उधर बढ़ लिए। रात में इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी जाती है। सड़क के दोनों तरफ गो गो बार और हर बार के सामने खड़ी दर्जनों लड़कियां पर्यटकों को आवाज देकर बुलाती नजर आएंगी। भीतर तेज म्यूजिक में डांस करती लड़कियों के दर्शन होंगे। इन गो गो बारो के बारे में पहले ही बहुत कुछ सुन चुका था। इस लिए हमारी भीतर जाने की हिम्मत नही हुई। वैसे सड़क पर भी मनोरंजन के लिए काफी गतिविधियां चल रही थी। एक फिल्म की शूटिंग भी शुरू थी। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे वाकिंग स्ट्रीट का चक्कर लगाने के बाद लौट रहे थे कि एक युवक पास में आकर पूछा सर इंडियन मुजरा देख लीजिए। रशियन लड़कियां हैं। 200 बाट लगेगासाथ मे बीयर फ्री। मैन कहा इंडियन मुजरा इंडिया में ही देख लेंगे भाई। तब तक रात के 1 बज चुके थे। मैथ्यू साहब के इंडियन रेस्टोरेंट में दाल खिचड़ी खा कर होटल पहुँचे और सो गए। सुबह कोरल आइलैंड जाने की योजना थी।
                                   कोरल आईलैंड पर बाईक की सवारी
मलेशिया निवासी हैंन को भारतीय नमकीन भेंट करते

कोरल आइलैंड जाने के लिए हम सुबह तैयार नही हो पाए। मुझे जहा समय से पहले तैयार हो जाने की ‘बीमारी’ है , वही मेरे सह यात्री बेहद आरामपसंद थे। होटल से निकलते-निकलते दोपहर के 12 बज गए। इस लिए पहले पेट पूजा फिर काम दूजा करने का निर्णय लिया गया। मैथ्यू जी के भारतीय रेस्टोरेंट में खाना खाया और होटल के मैनेजर शान को बताया कि कोरल आइलैंड जाना चाहता था। उन्होंने बताया कि वाकिंग स्ट्रीट का रास्ता तो आप लोग जानते ही है। जहाँ वाकिंग स्ट्रीट खत्म होता हैउसके थोड़ा आगे ही आप को समुन्द्र और बड़े बड़े बोट दिखाई देंगे। करीब 20 मिनट की पदयात्रा के बाद हम उस स्थान पर पहुच चुके थेजहा से हमे कोरल आइलैंड जिसे स्थानीय भाषा मे कोहलर कहते हैं। एक-एक व्यक्ति के लिए 30-30 बाट में टिकट खरीद कर बोट में सवार हो गए। यह बोट बिल्कुल वैसे ही थेजैसे बोट गेटवे आफ इंडिया और अलीबाग के लिए चलते हैं। करीब 25 मिनट के इंतज़ार के बाद बोट रवाना होने को तैयार था। तभी एक विदेशी युवक हमारे पास पहुँचा और बैठने के लिए थोड़ी जगह देने का निवेदन किया तो हमने उसे बैठने की जगह दे दी।
कोरल आईलैंड के रास्ते में दिखा यह खुबसूरत नजारा

हम मुंबई से अपने साथ नमकीन फरसाण खाखरा के खूब सारे पैकेट ले गए थे। कोरल आइलैंड की यात्रा के दौरान भी कुछ पैकेट साथ मे थे। बोट आगे बढ़ी तो सुरेश ने नमकीन का पैकेट खोला और उस युवक से भी लेने का आग्रह किया। उसने शुक्ला जी का आग्रह सहर्ष स्वीकार करते हुए नमकीन लिए। हँसमुख स्वभाव वाले उस युवक से बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो उसने बताया कि मेरा नाम हैंन है। हैंन मूलरूप से सूडान के रहने वाले हैं पर परिवार सऊदी अरब के दोहा में रहता है। वे मलेशिया में पढ़ाई कर रहे हैं। हैंन थोड़े समय मे हमारे मित्र बन गए। वे अकेले ही पटाया घूमने आए थे। करीब 30 मिनट की जलयात्रा के बाद हम कोरल आइलैंड पहुंच चुके थे। हम दोपहर के 3 बजे कोरल पहुचे थे और वापसी की अंतिम बोट शाम 6 बजे की थी। यानी हमारे पास आइलैंड घूमने के लिए 3 घंटे का समय था। वहां पर 200 बाट में मोटर बाइक किराये पर मिल रही थी। एक बाइक पर दो लोग सवार हो सकते थे पर हम तीन लोग थे। हैंन ने संतोष को अपनी बाइक पर बैठा लिया और मै सुरेश एक साथ हो लिए। कोरल आइलैंड पर कई बीच हैंजहाँ आप वाटर स्पोर्ट का आनंद ले सकते है। बाइक वाले ने 5.30 बजे तक वापस आने को बोल दिया था। इन ढाई घंटे में हम दो बीच पर गए और बुद्ध मुद्रा वाली विशाल मूर्ति देखने भी गए। इस बीच हैंन से मलेशिया और भारत के बारे में खूब बाते हुई। वे बॉलीवुड सितारों सलमान खानअमीर खान व शाहरुख खान को जानते हैं। हमने उन्हें भारतीय नमकीन भी भेंट की। हैंन अब हमसे फेसबुक के जरिये जुड़े हुए हैं। एक दूसरे का हालचाल लेते रहते हैं।                     
              शाम 5.30 बजे तक हम बाइक वापस कर अपना ड्राइविंग लाइसेंस ले पटाया आने के लिए बोट में सवार हो चुके थे। जलयात्रा पूरी कर हमने हैंन को बिदा किया। इस वादे के साथ कि कभी मलेशिया आये तो मिलेंगे। लगे हाथ उन्हें मुंबई आने का न्यौता भी दे दिया और पद यात्रा करते हुए वाकिंग स्ट्रीट से होते हुए होटल पहुँच गए। (जारी)




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