मेरी थाईलैंड यात्रा- 2 पटाया
पटाया में गूंज रही हिंदी
विजय सिंह कौशिक
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अल्काजार शो की प्रस्तुति |
अल्काज़ार शो देखने के बाद हम थियेटर के बाहर निकले तो शो के कलाकार दर्शको के साथ फोटो निलकवाने के लिए अपने पूरे कॉस्ट्यूम में मौजूद थे। हालांकि इसके लिए पैसे देने पड़ रहे थे। कलाकारों के साथ फोटो खिचाने के लिए कोई तय अमाउंट नही था, फ़ोटो निकालने के बाद आप अपनी मर्जी से जो चाहे दे दें। खूबसूरत सजी धजी ये ‘लड़कियां’ दरअसल किन्नर थे। थिएटर से हम पैदल ही होटल की तरफ चल पड़े। चहल कदमी के लिए हमने समुद्री बीच वाला रास्ता पकड़ा। तब तक शाम हो चुकी थी। पटाया बीच पर सड़क के एक तरफ बियर बारो की शृंखला है तो दूसरी तरफ बीच साइड में सौंदर्य का बाजार सज चुका था। करीब 3 किलोमीटर लंबे रास्ते पर दुनियाभर की लड़कियां मौजूद थी। उनके साथ कुछ मिनटों में ही साथ बिताने का सौदा तय होता और सुंदरियां अपने दुपहिया वाहनों पर उन्हें बैठा कर रफुचक्कर हो जाती।
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पटाया मार्केट में पानी पुरी का रेट 100 बाट में 8 यानि 200 भारतीय रुपए
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कोरल आईलैंड पर बाईक की सवारी
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| मलेशिया निवासी हैंन को भारतीय नमकीन भेंट करते |
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| कोरल आईलैंड के रास्ते में दिखा यह खुबसूरत नजारा |
शाम 5.30 बजे तक हम बाइक वापस कर अपना ड्राइविंग लाइसेंस ले पटाया आने के लिए बोट
में सवार हो चुके थे। जलयात्रा पूरी कर हमने हैंन को बिदा किया। इस वादे के साथ कि कभी मलेशिया आये तो मिलेंगे। लगे हाथ उन्हें
मुंबई आने का न्यौता भी दे दिया और पद यात्रा करते हुए वाकिंग स्ट्रीट से होते हुए
होटल पहुँच गए। (जारी)






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