गली-गली में शोर है, नेता साला चोर है......
विजय सिंह कौशिक
यह मै नहीं कह रहा हूँ.यह रामगोपाल वर्मा की 26 जनवरी को रिलीज हो रही फिल्म रण के गीत के बोल है. देश में बढती आत्महत्या, दहेज़, ग्लोबल वार्मिंग जैसी बहुत सी समस्याए है, जिनके लिए जागरूकता अभियान चलाने की बात होती रहती है. पर दिन प्रतिदिन राजनीति और नेताओ के गिरते स्तर को लेकर कब और कौन अभियान चलाएगा. यह सचाई है की हम नेताओ को चाहे जितना गाली दे दे.पर देश के इन नित-नियंताओ के बगैर काम भी नहीं चलने वाला नहीं है.आम आदमी नेताओ को गाली दे कर भले खुश हो ले पर इन्हें देश को लुटने से नहीं रोक सकते. क्योकि हर पाच बाद ये आप से वोट मागने आयेंगे.हो सकता है की इनसे नाराज होकर आप वोट देने जाये ही न जाये.लेकिन अपने इस कर्म से आप इन्हें लोकसभा और विधान सभा में पहुचने से नही रोक पाएंगे. मतदान जाहे २० प्रतिशत हो या ८० इससे इन्हें कई फर्क नहीं पड़ने वाला. इनकी जीत किसी भी तरह पक्की होनी चाहिए. पर आम आदमी करे भी तो क्या. सिनेमा हॉल में जब नेता साला.... का गीत बजेगा तो दर्शक ताली जरुर बजायेंगे. पर कल जब अपने इलाके के एमपी या विधायक से कोई काम लगा तो उनके दरवाजे पर जाकर नेता जी का सलाम करने की मज़बूरी से दो चार भी होना पड़ेगा.
साफ-सुथरी राजनीति की बात तो सभी करते है.पर आपराधियों को टिकट देने के मामले कोई पीछे नहीं रहने वाला. एक स्वम सेवी संगठन नेशनल इलेक्शन वाच के अनुसार 2009 में हुए maharastra विधान सभा चुनाव में जित कर विधान सभा में पहुच ५० प्रतिशत विधायको के खिलाफ क्रिमिनल केस चल रहे है.इनमे हत्या व्  डकैती जैसे मामले भी शामिल  है. इस बात का खुलासा इन माननीय नेताओ की तरफ से चुनाव आयोग को दिए हलफनामे से हुआ है.
                             लोकसभा चुनाव की बात है. दक्षिण मुंबई से कांग्रेस के एक बड़े नेता के सामने बसपा के टिकट पर मैदान में उतरे एक नेता को चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेसियों ने स्मगलर कह कर प्रजारीत किया. हालाँकि कांग्रेसियों ने बसपा नेता को सही उपाधि दी थी. बसपा नेता ने गलत तरीके से कमाए पैसे को पानी की तरह बहाया पर चुनाव नहीं जित पाए.कुछ महीने बाद विधान सभा चुनाव में कांग्रेसियों को इस इलाके में अपनी नैया पर लगाने के लिए स्मगलर नेताकी मदद लेनी पड़ी.उनसे वादा किया गया की उन्हें कांग्रेस में ले लिया जायेगे.जिससे उनके सारे  पाप धुल जायेंगे. उनकी कांग्रेस प्रवेश की तैयारी चल रही थी की यह खबर इस लेखक ने अपने अख़बार में छाप दी.जिससे स्मगलर नेता का कांग्रेस प्रवेश और शुधिकरन की योजना पर कुछ समय के लिए विराम लग गया. पर यह विराम ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगा. क्योकि नेताओ को लगता है की जनता की यादाश्त बहुत कमजोर होती है.

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