क्या मिलेगा पूर्वांचल से
यह मेरा तर्क है
* विजय सिंह "कौशिक"
कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी की उत्तर प्रदेश में सक्रियता से परेसान मायावती ने पूर्वांचल राज्य का शगुफा छोड़कर लोगो का ध्यान बाटने की कोशिस की है. इससे भले ही मायावती को राजनीतिक लाभ मिले पर अलग पूर्वांचल से वहा के लोगो कुछ नहीं मिलने वाला है. मेरा मानना है की यदि नेतृत्व काबिल न हो तो छोटे राज्य भी विकास की गारंटी नहीं हो सकते. पूर्वांचल में माफियाओ का राज्य चलता है. अब ये माफिया राजनीती का चोला पहन चुके है. कल तक जिन्हें पुलिस खोजती फिरती थी. आज वही पुलिस उनकी जी-हजुरी करने को मजबूर है. अपने बड़े आकार के चलते देश की देश की राजनीति तय करने वाले उत्तर प्रदेश के विभाजन से इस राज्य की राजनीतिक ताकत घटेगी. जिसकी वजह से राज ठाकरे जैसो को पूर्वांचलवासियों ( पूर्वांचल राज्य बना तो) पर निशाना साधना और आसान हो जायेगा. यह वही मायावती है जिन्होंने कभी राज ठाकरे की घटिया राजनीति की मुखालफत नहीं की. क्योकी उन्हें दलित बाहुल्य maharastra में अपनी पार्टी बसपा की भविष्य उज्जवल नज़र आ रहा था. हालाँकि लोकसभा और विधान सभा चुनाव परिणामो ने उन्हें जमीनी हकीकत से अवगत करा दिया. इन चुनावो में maharastra में बसपा उम्मीदवारों ने जमानत जप्त करवाने का रिकार्ड बनाया. माया की बसपा मुलायम की सपा के मुकाबले बेहद कमजोर साबित हुई. खैर मेरा विषय maharastra के चुनाव परिणाम नहीं, हम बात कर रहे है पूर्वांचल राज्य के निर्माण से होने वाले नफे-नुकसान की. आज पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था मुंबई, दिल्ली, कोलकता जैसे शहरों में रहने वाले मेहनतकश पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगो के कंधो पर टिकी है. इन शहरों से मणिऑर्डर न जाये तो कई घरो में चूल्हे न जले.
उत्तरप्रदेश के राजनेताओ ने ही पूर्वांचल को सबसे ज्यादा चला छला है. आंबेडकर पार्क और अपनी मूर्तियों पर करोडो श्वाहा करने वाली मायावती को पूर्वांचल में उद्योग-धंधे लगाने की याद क्यों नही आई. अब वे पूर्वांचल को अलग कर इस पिछड़े इलाके से अपना पीछा छुड़ाना चाहती है. पूर्वांचल राज्य बना तो इस बात की सम्भावना अधिक है की इस इलाके के माफिया ही इस राज्य का मुख्यमंत्री तय करेगे. कल्पना की जा सकती है की इसी परिस्थिति में पूर्वांचल का भविष्य कैसा होगा.
आप पूर्वांचल राज्य निर्माण को लेकर क्या सोचते है. आपने विचारो से हमें जरुर अवगत कराए. हो सकता है की इसको लेकर आप अलग राय रखते हो. आप के विचारो का स्वागत है.
यह मेरा तर्क है
* विजय सिंह "कौशिक"
कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी की उत्तर प्रदेश में सक्रियता से परेसान मायावती ने पूर्वांचल राज्य का शगुफा छोड़कर लोगो का ध्यान बाटने की कोशिस की है. इससे भले ही मायावती को राजनीतिक लाभ मिले पर अलग पूर्वांचल से वहा के लोगो कुछ नहीं मिलने वाला है. मेरा मानना है की यदि नेतृत्व काबिल न हो तो छोटे राज्य भी विकास की गारंटी नहीं हो सकते. पूर्वांचल में माफियाओ का राज्य चलता है. अब ये माफिया राजनीती का चोला पहन चुके है. कल तक जिन्हें पुलिस खोजती फिरती थी. आज वही पुलिस उनकी जी-हजुरी करने को मजबूर है. अपने बड़े आकार के चलते देश की देश की राजनीति तय करने वाले उत्तर प्रदेश के विभाजन से इस राज्य की राजनीतिक ताकत घटेगी. जिसकी वजह से राज ठाकरे जैसो को पूर्वांचलवासियों ( पूर्वांचल राज्य बना तो) पर निशाना साधना और आसान हो जायेगा. यह वही मायावती है जिन्होंने कभी राज ठाकरे की घटिया राजनीति की मुखालफत नहीं की. क्योकी उन्हें दलित बाहुल्य maharastra में अपनी पार्टी बसपा की भविष्य उज्जवल नज़र आ रहा था. हालाँकि लोकसभा और विधान सभा चुनाव परिणामो ने उन्हें जमीनी हकीकत से अवगत करा दिया. इन चुनावो में maharastra में बसपा उम्मीदवारों ने जमानत जप्त करवाने का रिकार्ड बनाया. माया की बसपा मुलायम की सपा के मुकाबले बेहद कमजोर साबित हुई. खैर मेरा विषय maharastra के चुनाव परिणाम नहीं, हम बात कर रहे है पूर्वांचल राज्य के निर्माण से होने वाले नफे-नुकसान की. आज पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था मुंबई, दिल्ली, कोलकता जैसे शहरों में रहने वाले मेहनतकश पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगो के कंधो पर टिकी है. इन शहरों से मणिऑर्डर न जाये तो कई घरो में चूल्हे न जले.
उत्तरप्रदेश के राजनेताओ ने ही पूर्वांचल को सबसे ज्यादा चला छला है. आंबेडकर पार्क और अपनी मूर्तियों पर करोडो श्वाहा करने वाली मायावती को पूर्वांचल में उद्योग-धंधे लगाने की याद क्यों नही आई. अब वे पूर्वांचल को अलग कर इस पिछड़े इलाके से अपना पीछा छुड़ाना चाहती है. पूर्वांचल राज्य बना तो इस बात की सम्भावना अधिक है की इस इलाके के माफिया ही इस राज्य का मुख्यमंत्री तय करेगे. कल्पना की जा सकती है की इसी परिस्थिति में पूर्वांचल का भविष्य कैसा होगा.
आप पूर्वांचल राज्य निर्माण को लेकर क्या सोचते है. आपने विचारो से हमें जरुर अवगत कराए. हो सकता है की इसको लेकर आप अलग राय रखते हो. आप के विचारो का स्वागत है.
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