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Showing posts from October, 2017

थाईलैंड यात्रा- 3 बैंकाक में बसता है एक उत्तर भारत

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                                         थाईलैंड में बसता है एक उत्तर भारत   बैंकाक में भारतवंशी श्याम सिंह-शोभा सिंह परिवार के साथ                                              विजय सिंह कौशिक आज (14 सितंबर 2017) पटाया से बैंकाक के लिए रवाना होना था। फेसबूक के माध्यम से हमारे फेसबुकिया मित्रो को हमारे थाइलैंड में होने की जानकारी मिल गई थी। गोरखपुर में रहने वाले मेरे फेसबूक मित्र आलोक विकाशचंद कौशिक जी ने फेसबुक पर  संदेश भेजा कि ' अपने बहुत से लोग बैंकाक में हैं, कोई जरूरत हो तो बताना' मैने जवाब में लिखा कोई जरूरत तो नही पर परदेश में अपने देशवाशियों से मिल कर अच्छा ही लगेगा। उसके बाद आलोक जी ने बैंकाक में रहने वाले अपने रिश्तेदार श्याम सिंह जी और उनकी धर्मपत्नी शोभा सिंह जी को हमारे बारे में बताया और हमारा फोन नंबर भी उन्हें दे दिया। श्याम जी और...

मेरी थाईलैंड यात्रा- 2 पटाया

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                                            पटाया  में गूंज रही   हिंदी                                         विजय सिंह कौशिक                                             पटाया का समुद्री किनारा हम   पटाया   स्थित होटल के कमरे में पहुंच चुके थे। हम तीनों में से किसी का मोबाईल इंटरनेशनल रोमिंग की सुविधा वाला नहीं था। घरवालों को विदेश पहुंचने की सूचना देना भी जरूरी था। होटल में वाई-फाई की सुविधा मौजूद थी। व्हाट्सएप चालू करने के लिए होटल के मैनेजर से पासवर्ड हासिल किया। विदेश यात्रा के दौरान व्हाट्सएप खुब कारगार रहा। व्हाट्सएप कालिंग से घर पर बात हो गई साथ ही मुंबई में क्या हो रहा है ,  इसकी भी जानकारी मिलती रही।   ...

मेरी थाईलैंड यात्रा (1)

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  पासपोर्ट को विदेश यात्रा कराने करना पड़ा   लंबा इंतजार                    विजय सिंह कौशिक   मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर   बात   15 साल पहले की है , जब मैंने एक न्यूज चैनल में बतौर रिपोर्टर काम की शुरुआत की थी। एक दिन चैनल के   मालिक ने रिपोर्टरों के साथ बैठक ली और अचानक पूछा कि किस-किस के पास पासपोर्ट है ? दुबई चलना है। मेरे साथ वहां मौजूद हमारे किसी साथी के पास उस वक्त पासपोर्ट नहीं था। बस उसी दिन तय किया कि पासपोर्ट बनवाना है , न जाने कब विदेश जाने का मौका मिल जाए।                        तब पासपोर्ट बनवाने के लिए आनलाईन आवेदन की सुविधा नहीं थी। संयोग से मेरी बिल्डिंग में रहने वाले एक सज्जन सावंत साहब पासपोर्ट आफिस में काम करते थे। दूसरे दिन ही मैं सावंत साहब को पकड़ लिया। बोला पासपोर्ट बनवाना है। अगले दिन ही सावंत साहब पासपोर्ट बनवाने के लिए फा...